Prafull Chandel

Prafull Chandel
Author of the Blog

Friday, May 29, 2015

Safe drinking water availability and testing in Bilaspur area

छत्तीसगढ़ राज्य की VHNSC सद्श्यों और मध्यम दर्जे के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (मितानिनों, प्रेरकों ) के लिए पहली बार ....


1. Water purification from chlorine solution
2. Testing kit For chlorination in water
3. Water testing bottle 
4. How make chlorine solution with step by step all measuring things
These steps are available simple text written in the Hindi lang           


                                                             

Prafull and Harendra 


पानी में क्लोरिन की जाँच व क्लोरिन घोल बनाने के लिए किट


हर गाँव/पारा या समुदाय में पीने की पानी को शुद्ध करने के तरीकों में सबसे ज्यादा क्लोरिन का उपयोग किया जाता है, क्लोरिन के उपयोग से पीने की पानी को पीने लायक बनाया तो जाता है, पर क्या पानी में क्लोरिन की मात्रा सही है? इसकी जाँच लगभग नहीं की जाती है. जब किसी भी गाँव में खासकर कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डाला जाता है तो हर बार गाँव के लोंगों का कहना होता है बिना नापे अजरा डाला दिया गया है पानी को पिया नहीं जा रहा है.

इसका मतलब है एक ही बार में ज्यादा से ज्यादा क्लोरिन डल गया है. इसका कारण है कि क्लोरिन डालने वाले सद्श्यों जिसमें (VHNSC) होते है उनके पास क्लोरिन डालने की ठीक जानकारी तुरंत लिखित में नहीं होती है सब अंदाजे से चलते रहता है परिणाम होता है कम या ज्यादा क्लोरिन डालना. इसके अलावा क्लोरीनेशन करने के जरुरी सामान की भी उपलब्धता नहीं होना पाया गया है.
इसके अलावा क्लोरिन डालने में दूसरी तरह की भी दिक्कत है- जैसे कम पानी में क्लोरिन कैसे डाले?  
और हमारे साथी कोशिश करके भी क्लोरीनेशन का काम ठीक नहीं कर पाते है

इन्ही सभी बातों को ध्यान में रखकर हमनें क्लोरीनेशन करने वाले सद्श्यों के लिए एक जरुरी किट बनाया है जो उनको अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने में सहायक होगी.





जरुरी सामग्री-
1.    २ किलो वाला मापक
2.    ब्लीचिंग पाउडर
3.    CHLOROTEX REGENT
4.     Color chart
5.     1 ml siring
6.     10 ml कांच की परख नली
7.    15 लीटर वाली प्लास्टिक की बाल्टी
8.    सूती कपडा छन्नी के लिए
9.    फेस मास्क
10.    रबड़ के ग्लब्स
11.    2 ml सीरिंग या कैप


क्लोरिन घोल कैसे बनाये-

·        जैसे 20 लीटर पीने का साफ पानी लें.
·        उसमें अच्छी तरह से तौलकर 1000 ग्राम अर्थात प्रति लीटर 50 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डाले.
·        अपने हाथ में पहने दस्ताने की मदद से सब ब्लीचिंग पाउडर को मसलते हुए पानी में मिलाये.
·        1 घंटे तक पानी को स्थिर रहने दें.
·        1 घंटे के बाद में ब्लीचिंग पाउडर डाले पानी को साफ दुसरे बर्तन में सूती कपडे की सहायत से छान लें.
·        गेलंन में लेबल लगाकर गाँव में ले जाने को तैयार क्लोरिन घोल को अँधेरे और कम लाइट वाले जगह में रखें.

क्लोरिन घोल से पानी को साफ करने की विधि-

·        गाँव के सभी घरों में क्लोरिन घोल को 30-30 ml के हिसाब से पहुंचाए.
·        हर परिवार का पीने की पानी रखने वाले बर्तन की नाप करें.
·        परिवार वालों को शिक्षित करें की हर 10 लीटर पानी में 1 ml/ 20 लीटर पानी में सिर्फ 2 ml घोल डालें.
·        कम से कम 1 घंटा पानी मने क्लोरिन सालुसन डालने के बाद पानी को पीने के लिए उपयोग करना ठीक.

सावधानियां-
·        क्लोरिन घोल बनाने वाले ब्यक्ति को फेस मास्क और ग्लब्स हमेशा उपयोग करें.
·        घोल बनाने के अपनी माप अच्छे से करें.
·        खुले और हवादार कमरें में घोल बनाये.
·        बने घोल की लेबलिंग करें.
·        हमेशा बच्चों की पहुँच से देर रखें.
·        10 पानी में खुद प्रयोग करें और CHLOROTEX REGENT से बने घोल से जाँच करें. फिर OK करें.

CHLOROTEX REGENT से पानी में क्लोरिन की मात्र की जाँच कैसे करें-
·        पहले एक पारदर्शी कांच की बर्तन से 10 ML क्लोरिन सालुशन डाले पानी लें.
·        उसमें 1 ML CHLOROTEX REGENT का कैमिकल डाल लें.
·        30 सेकेण्ड तक उसे पानी में मिलने दें.
·        अब आपके पास कुछ न कुछ रंग में परिवर्तित पानी का रंग मिलान करें( जो आपके किट में चार्ट है)
·        अब तो आपके हाथ में है क्या क्लोरिन की मात्र ज्यादा है या उससे कम है बताये .

CHLOROTEX REGENT कहाँ से मिलता है?
यह कैमिकल CHLOROTEX REGENT नाम से किसी भी स्कुल की प्रयोग शालाओं के लिए मिलने वाली कैमिकल की कोई भी दुकान से प्राप्त की जा सकती है.


किट की कीमत-
उपरोक्त सभी जरुरी सामग्री को एक साथ रखा किट की कीमत अभी --------- रखा गया है.






Sunday, March 15, 2015

Scabies a big Public Health Problem in Baiga community

छत्तीसगढ़ के प्रायमरी और मिडिल स्तर के स्कूलों का बेहाल

छत्तीसगढ़ के प्रायमरी और मिडिल स्तर के स्कूलों के अधिकांश बच्चों को बड़ी खुजली( Scabies) की महामारी चल रही है, ये बच्चे किसी भी तरह से स्कूलों में तो आते है पर वे खुजली की बीमारी से अत्यंत परेशान होते है. ऐसे में बच्चों के अधिकांश समय स्कूलों में पढ़ने के बजाय खुजली के परेशानी से जूझते रहते है. ऐसे बच्चे जो ठीक तरह से घरों से जाते है उनके सम्पर्क में आने से उनको भी Scabies की दिक्कत हो जाती है. 



एक सर्वे के अनुसार ऐसे बच्चे जो बैगा इलाके के छात्रावास में उपरोक्त स्तरों की पढाई करते है उनमें 59 प्रतिशत बच्चे किसी  न किसी समय Scabies से प्रभावित होते है.

जानकारों में माना जाता है कि जब किसी भी बच्चों को ज्यादा दिन तक खुजली की परेशानी होती है उसका असर उनके गुर्दे पर भी पाया जाता है.



क्या किया जा सकता है-


सभी ऐसे जगह का चुनाव करे जहां पर Scabies की परेशानी है?
सामुदायिक स्तर पर इलाज की ब्यवस्था की जाना चाहिए.
छात्रावास में सभी सोने और पहनने के कपड़ो को एक साथ धोने की व्यवस्था करनी चाहिए.


(प्रफुल्ल चंदेल)
जन स्वास्थ्य सहयोग